Saturday, May 5, 2007

अब दूरी ...

अब दूरी .....
सही जाये ना; दूर तुझसे रहा जाये ना .....
तेरी इक इक अदा मेरे दिल को भा गई,
दूर तालों में बंद था दिल मेरा,
जालिम उस पर भी नश्तर चला गई
ख़ून-ए-दिल जो अब बहा है,
उस से बस नाम तेरा लिखा है।
रहती है रूह प्यासी,
छायी है दिल पर उदासी,
आती जाती साँसे ,
बस तुझको ही हैं बुलाती,
आ भी जा अब; पास मेरे ,
दे दे करार; इस दिल को मेरे,
सच कहता हूँ मैं,
तुझसे अब एक पल कि दूरी; ना सही जाये मुझसे.....
--- अमित

1 comment:

Jitendra Chaudhary said...

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