Wednesday, June 6, 2012

नया पहाड़ा ...

गणित हमारी हमेशा थी खराब
पहाड़ो ने थी जान हमेशा मारी ...
नया पहाड़ा हमने एक बनाया है
चलो देखे किसको समझ यह आया है ...
पैसा ऐकम पैसा
सबका मालिक एक यह , जैसा ..
पैसा दुनी पैसा
स्वेत- श्याम दो रंगों में रहता ...
पैसा तीये पैसा
भुत-वर्तमान-भविष्य हाथ में इसके रहता ...
पैसा चौके पैसा
चारो दिशाओं में डंका बजता इसका रहता ...
पैसा पंजे पैसा
पंच तत्वों की जान सा यह रहता...
पैसा छिक्के पैसा
छठी इन्द्री का मालिक बन यह रहता ...
पैसे सत्ते पैसा
सात सुरों पर भी भारी यह रहता ...
पैसा अठ्ठे पैसा
अस्ठ सिद्धी का दाता बनके रहता...
पैसा निम्मे पैसा
नव-गृह सारे यह हिलाए रहता...
पैसा दिसाम पैसा
पैसे का तोड़-जोड़ बस है पैसा ...
गणित ने कभी था जन्मा पैसा
और हर गणित आज बदलता पैसा ...

Thursday, April 5, 2012

फैशन स्ट्रीट...

बड़ी तेज है रफ़्तार इसकी , जरा चुस्त रहिये

नाम है इसका फैशन , बस दौड़ते रहिये ...

पलक झपकते ही यहाँ मंज़र बदल जाते है

जरा हुए आप सुस्त, फिर ओल्ड फैशंड ही कहलाते है...

सामाजिक होने के मानक भी अब इसी से दिए जाते है

नीचे इसके कुछ विशेष चिन्ह आप सहायता को दिए जाते है ...

लाल गुलाबी रंग थे, जो कभी नाखुनो की शोभा बढाते

विश्व भर के देशों के झंडे आज है नाखुनो पर नज़र आत ...

बात आज मेरी समझ में आती है,

क्यों मिस. यूनिवर्स शांति दूत बनाई जाती है...

विश्व भर के झंडे उसके नाखुनो में सिमट जाते है

हवा में हाथ के साथ झंडे में लहर जाते है...

गायब ही होगी है अब कहीं होठों की वो लाली

जाने किसने होठं अब काली , पीली , नीली रंग डाली...

रहस्य इसका भी गहराई से देखो तो समझ आता है

किसने कहा, गुलाब सिर्फ लाल रंग में नज़र आता है...

तंदुरुस्ती की उपमा, अब आप के कपड़ो से की जाती है

जितने हो तंग कपडे, तंदुरुस्ती और सुन्दरता उतनी ही कही जाती है ...

लगता है आप अपनी दिशा से कुछ भरमा गये,

बात है ज्ञान की और आप भौतिकता में आ गये...

क्यों बढ़ी गलो और कन्धों की गहराई, यह बात अभी मेरी समझ पर भारी है

शोध अभी जारी है, छोटी-छोटी बाधाओं से क्या हमने कभी हिम्मत हारी है ...

वैसे फैशन स्ट्रीट ने दिया है, दीवानेपन को भी पूरा मान

"गरेबां और चाक", आये दिन होते है एक दूजे के मेहमान...

फैशन स्ट्रीट पर यों तो स्त्री हमेशा से ही परुष पर भारी है

मगर कुछ महानुभावो ने पुरुषों की और से जीमेदारी संभाली है ...

कभी आपने गौर किया, जो ईश्वर न कर सका वो उन्होंने कर दिखाया है

कमर से थोडा नीचे, कमर को उसका नया स्थान दिलाया है ...

मनचलों के लिए है परेशानी का एक सबब बढ़ते उनके बालो की लम्बाई

समझ न अक्सर यह आता है, आगे जाती देवी जी हैं , या उनका कोई भाई ...

कुछ महानुभाव तो इस से भी आगे निकल जाते है

चलो कहानी हम फिर कभी सुनाते है ...

फैशन स्ट्रीट का आज बस करते है इतना ही प्रचार

चलो कस लो कमर, कहीं नज़र न आओ लाचार ...

आफिसिअल लैपटॉपधारी ...

याद है हमका दिन

हुई थी जब लैपटॉप अलोकेशन

अकड़ कैसन गई थी गर्दन तुहारी

वाह री दुनिया, ये हैं आफिसिअल लैपटॉपधारी !


ख़ुशी से थे जाने कितने हर्षाये

बीवी को अपनी फोन डेस्क से हमारी ही लगाये

क्या बस यह है औकात तुहारी

वाह री दुनिया, ये हैं आफिसिअल लैपटॉपधारी !


बिजली से ही यह चलता है

लगी बैटरी, बेकउप भी मिलता है

करउ कैसे इस्तमाल, समझ न आइये तुहारी

वाह री दुनिया, ये हैं आफिसिअल लैपटॉपधारी !


काम तो यों कंप्यूटर पर भी चलता था

यही था डेटा जो उसमे भी रहता था

लैपटॉप पर बढ़ गई किर्टीकेलिटी बेचारी

वाह री दुनिया, ये हैं आफिसिअल लैपटॉपधारी !


हमऊ भी जानत है किर्टीकेलिटी तुहारी

पता है सब कहाँ छुपी वो फिल्मे सारी

समझते हो हमको अनाड़ी, गलती है तुहारी

वाहरी दुनिया, ये हैं आफिसिअल लैपटॉपधारी !


भूख प्यास तब भी तुमको बड़ा सताती थी

पड़ती आज भी यह बाकी कामो पर भारी

अब डायनिंग टेबिल और कंप्यूटर में अंतर समझ न आये तुहारी

वाह री दुनिया, ये हैं आफिसिअल लैपटॉपधारी !


पास तुहारे हर कोना कोना चमकता

दिखे जो धुल, फटका तुरंत है पड़ता

लैपटॉप में जा छुपी डर के ऊ धुल बेचारी

वाह री दुनिया, ये हैं आफिसिअल लैपटॉपधारी !


क्लाइंट करता नाक में दम तुहारी

और बीबी बच्चे अलग तुम पर भारी

झुंझलाहट तुमने बेचारी स्क्रीन पर उतारी

वाह री दुनिया, ये हैं आफिसिअल लैपटॉपधारी !


एक लैपटॉप है दूजे जैसा

काम करे पहले जैसा

जाने देख नया मोडल क्यों लबलबाती जीभ तुहारी

वाह री दुनिया, ये हैं आफिसिअल लैपटॉपधारी !


फिर एक ऊ दिन भी आया

बदलाव जब अलोकेशन पोलिसी में आया

शक्ले कैसी लटक गईं थी छुट- भाइयों की सारी

वाह री दुनिया, ये हैं आफिसिअल लैपटॉपधारी !


बिना वाई- फाई किस्सा अधुरा रह जाता

किरदार अपना येँ भी पूरा निभाता

दुम सा येँ पीछे चले , इह इच्छा तुहारी

वाह री दुनिया, ये हैं आफिसिअल लैपटॉपधारी !


खुद के वज़न पर काबू न कभी तुम कर पाये

देख ३ किलो का वजन इसका तुम बड़े घबराये

क्या इनती भी नहीं जान कलाइयों में तुहारी

वाह री दुनिया, ये हैं आफिसिअल लैपटॉपधारी !


कद्रदानी में कुछ तो मिसाल कायम कर जाते हैं

चोरी लैपटॉप बाबू तक उनके हो जाते हैं

जाने कैसे निभाते हैं ऊ लोग बड़ी जिम्मेदारी

वाह री दुनिया, ये हैं आफिसिअल लैपटॉपधारी !


ख़ास कुछ महकमे वाले बड़ा इतराते हैं

छोटी छोटी बातों पे ऊ एस्कलेशन बड़ा कराते हैं

कौन समझाये अपने लोगन पर कैसे रोबदारी

वाह री दुनिया, ये हैं आफिसिअल लैपटॉपधारी !


लौट विदेश से , सातवे आसमान पर कुछ तो पहुँच जाते हैं

बड़ी चतुराई से ऊ कुंडली लैपटॉप पर मार जाते हैं

काहे मज़बूरी औरन की समझ न आये तुहारी

वाह री दुनिया, ये हैं आफिसिअल लैपटॉपधारी !


किस्सा बैग का भी पूरा दिलचस्प रहा

जो मिले बैग पुराना, घटती शान तुहारी

शक्ल बिगाड़ी नये की, क्या यही है हैण्डलिंग तुहारी

वाह री दुनिया, ये हैं आफिसिअल लैपटॉपधारी !


टीम लैपटॉप तो और आगे निकल जाता है

घर की तुहारे ऊ शोभा बढ़ता है

क्या यही रह गई नैतिकता तुहारी

वाह री दुनिया, ये हैं आफिसिअल लैपटॉपधारी !


जाने कैसन इनको कोई समझाये

क्यों न पानी में शक्कर से हम मिलजाये

मेल जोल बना दिखाए हम समझदारी

और हम भी कहे गर्व से, हाँ ये हैं आफिसिअल लैपटॉपधारी !

Saturday, March 17, 2012

साल २०१२-२०१३ का आम बजट

गये दिन रेल बजट संसद में आया था
रेल यात्रा होगी सुगम यह दर्शया था ...
इस साल दिवाली पर आप को टिकिट ज़रूर मिल जायगी
क्योंकि बहुतों से नई कीमत नहीं चुकाई जायेगी ...
७५ नई गाड़ियों को भी इस साल देश में चलाया जाएगा
मंत्री जी के अगर है रिश्तेदार तो एक -दो को आप के शहर से भी गुजरा जायेगा ...
आम बजट आज संसद में आया
शायद मिले कुछ ख़ुशी, सोच टी.वी. हमने लगाया...
मंत्री जी के पिटारे से फिर बजट का भूत बाहर आया
देख पहली झलक जिस की दिल अपना घबराया ...
जिसकी न थी उम्मीद, उन्होंने फिर वही कर दिखाया
आम आदमी था पहले ही गड्डे में, पानी उहोने उसमें डलवाया...
३ लाख तक पहुँच जायगी इनकम टैक्स की छुट, रुक्का था
२ लाख तक पहुँच, दम उस बेचारी सुई का टूटा था...
वैसे यह थी पहली बार जब सरकार ने महिला-पुरुष में समानता दिखाई
इनकम टैक्स छूट की सीमा , दोनों की ही बराबर करवाई ...
आप जीये वर्तमान में, किया उसका पूरा इंतजाम
भविष्य बचत सीमा पर फिर जोर से खींचे रखी लगाम ...
पेट्रोल, रेल और हवाई यात्रा के बढ़ा दाम , पर्यावरण पर दिया ध्यान
हमारे यहाँ घर ही सबसे सुरक्षित है, सबको दिया यह अनमोल ज्ञान ...
घर पर आप बोर न हो जाए, इसकी व्यवस्था उन्होंने की है
एल-सी-डी टी.वी. के दामो में उन्होंने छूट इसी लिए तो की है ...
सस्ते मकानों पर आप को ब्जाय दर में छूट दी जायेगी
खज़ाना न हो जाए खाली, बस सीमेंट की कीमत थोड़ी बढ़ा दी जायेगी ...
बहुत अरसा से घाटा झेला है, अब डीजल के दामो को बढ़ाया जायेगा
समझदार को इशारा काफी, इसका असर कहाँ-कहाँ नज़र आयेगा...
अरे सरकार को यह दोष न दीजिये की सुविधों को उन्होंने नहीं बढ़ाया
फिर क्यों २% सर्विस टैक्स के इजाफे से आपके माथे पर पसीना आया ...
हम तो यह सोच खुश है, सरकार कहती कम हुई है अब महंगाई
सोचो क्या फिर होता अपना, अगर कहीं गलती से बढ़ गई होती महंगाई ...