Monday, August 8, 2011

भारत सरकार हूँ मैं ...

देता नहीं मुझे

कुछ होता गलत दिखाई,

करूं क्या, नेत्रहीन हूँ मैं !

देती नहीं मुझे

गुहार किसी की सुनाई,

करूं क्या, बधिर हूँ मैं !

चुप ही रहता हूँ

विरोध नहीं कर सकता गलत का,

करूं क्या, मूक हूँ मैं !

होती नहीं महसूस

किसी की वेदना मुझे,

करूं क्या, संवेदनाहीन हूँ मैं !

देखते क्यों हों

मेरी तरफ साहरे की आस से,

करूं क्या, खुद अपंग हूँ मैं !

दिखते क्यों इतने हो हैरान

यही तो है मेरी पहचान ,

हाँ,

करूं क्या, भारत सरकार हूँ मैं !

मुझे न आता है देश के काम आना

बस आता है मुझे,

अपने शून्य (0) का आठ (8) बनाना !

2 comments:

संजय भास्कर said...

उम्दा सोच
भावमय करते शब्‍दों के साथ गजब का लेखन ...आभार ।

प्रवेश गौरी 'नमन' said...

आपके सफल ब्लॉग के लिए साधुवाद!
हिंदी भाषा-विद एवं साहित्य-साधकों का ब्लॉग में स्वागत है.....
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