Sunday, April 11, 2010

सपना ...

सपने,
एक छोटा सा शब्द
जो बदल दे , दुनिया ...
बिना एक सपने के
न होता बड़ा काम पूरा...
चहाइए सबको
देखें वो कोई न कोई सपना ...
मगर वो ,
जो टूट के बिखर जाए
टूटे एक सपने के साथ
नहीं अधिकार उनको
वो देखे कोई सपना ...
--- अमित ११/०४/२०१०

3 comments:

Udan Tashtari said...

चहाइए सबको
देखें वो कोई न को सपना ...


-चाहिए सबको
देखें वो कोई न कोई सपना...


-कृपया टंकण त्रुटि सुधार लें.

Shekhar kumawat said...

bahut kub

http://kavyawani.blogspot.com/

shekhar kumawat

संजय भास्कर said...

हमेशा की तरह उम्दा रचना..बधाई.