पता नही क्या था वो
समय का बहाव
या;
मेरे दिल में
कुछ ज़ज्बात दबे थे
जो बह निकले शब्द बन कर
और नाम हुआ कविता
पता नही ...
आज भी , वही मैं हूँ
वही मेरा दिल
वही मेरी ज़ज्बात
गर नही है कोई तो
बस शब्द ,
पता नही क्यों ...
ये ब्लॉग मेरी व्यक्तिगत डायरी है... मेरी ख़ुद की भावनाए और विचार, जिनको मैं आप के साथ बाट रहा हूँ... आशा करता हूँ कोई भी "अन्यथा" नही लेगा...
धन्यवाद !
1 comments:
sunder bhav dil se.
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