Wednesday, June 6, 2012

नया पहाड़ा ...

गणित हमारी हमेशा थी खराब
पहाड़ो ने थी जान हमेशा मारी ...
नया पहाड़ा हमने एक बनाया है
चलो देखे किसको समझ यह आया है ...
पैसा ऐकम पैसा
सबका मालिक एक यह , जैसा ..
पैसा दुनी पैसा
स्वेत- श्याम दो रंगों में रहता ...
पैसा तीये पैसा
भुत-वर्तमान-भविष्य हाथ में इसके रहता ...
पैसा चौके पैसा
चारो दिशाओं में डंका बजता इसका रहता ...
पैसा पंजे पैसा
पंच तत्वों की जान सा यह रहता...
पैसा छिक्के पैसा
छठी इन्द्री का मालिक बन यह रहता ...
पैसे सत्ते पैसा
सात सुरों पर भी भारी यह रहता ...
पैसा अठ्ठे पैसा
अस्ठ सिद्धी का दाता बनके रहता...
पैसा निम्मे पैसा
नव-गृह सारे यह हिलाए रहता...
पैसा दिसाम पैसा
पैसे का तोड़-जोड़ बस है पैसा ...
गणित ने कभी था जन्मा पैसा
और हर गणित आज बदलता पैसा ...

2 comments:

sakhi with feelings said...

paise ki sahi table bana daali..bahut khub

रचना said...

good one amit